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रोज़ कम से कम
10–15 मिनट गहन योग में बैठकर बापदादा से हृदय से
मिलन का अभ्यास करना।
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पूरे दिन में कम
से कम 5 बार एक मिनट का “साइलेंस ब्रेक” लेकर आत्मा–स्वरूप की स्मृति
में स्थित होना।
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हर बोल से पहले 2
सेकंड रुककर मीठे, मर्यादित और लाभदायक शब्दों का चयन करने का अभ्यास
करना।
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आज का पूरा दिन
देह-अभिमान से मुक्त रहकर “मैं शांति का सितारा आत्मा हूँ” ऐसा
स्व-परिचय बार‑बार स्मरण करना।
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सेवा में रहते
हुए भी अंतर्मन में एकाग्रता और शक्ति बढ़ाने के लिए दिन में एक बार
15–20 मिनट गहरा मौन साधना करना।
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महादिवस (31
दिसंबर/नए वर्ष) के अनुभवों को अपनी डायरी में लिखकर, किन संकल्पों पर
चलना है, उसकी सूची बनाना।
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किसी एक पुरानी
कमज़ोरी (क्रोध, आलस्य, निंदा, आलोचना आदि) को पहचानकर, अगले 7 दिन उसके
पूर्ण परिवर्तन का संकल्प लेना।
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रोज़ मुरली का
रिवीज़न करके, कम से कम 3 महावाक्यों को याद करना और दिन भर उन्हें
व्यवहार में लाने की कोशिश करना।
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अपने चारों ओर के
वातावरण को “मधुबन जैसा पवित्र और शक्तिशाली” बनाने के लिए शुद्ध
संकल्पों का वातवरण तैयार करना।
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किसी एक आत्मा को
प्यार भरा संदेश, मुरली‑लिंक या सकारात्मक वाइब्रेशन भेजकर स्नेहयुक्त
आत्मिक संबंध मज़बूत करना।