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मैं शांत स्वरूप
आत्मा हूँ, हर परिस्थिति में शांति का प्रकाश फैलाऊँगा।
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मैं प्रेमस्वरूप आत्मा हूँ, हर रिश्ते में निश्छल प्रेम का व्यवहार
करूँगा।
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मैं ज्ञानस्वरूप आत्मा हूँ, हर निर्णय ज्ञान और समझ से लूँगा।
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मैं शक्तिस्वरूप आत्मा हूँ, नकारात्मक संकल्पों पर विजय पाकर रहूँगा।
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मैं निर्विकारी आत्मा हूँ, किसी के प्रति भी क्रोध, ईर्ष्या या द्वेष
नहीं रखूँगा।
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मैं निश्चयबुद्धि आत्मा हूँ, ईश्वरीय मार्ग पर अडिग रहूँगा।
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मैं कृतज्ञ आत्मा हूँ, हर दिन शिवबाबा और प्रकृति का आभार व्यक्त करूँगा।
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मैं दयालु आत्मा हूँ, हर आत्मा को दुआएँ देने का अभ्यास करूँगा।
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मैं निर्मोह आत्मा हूँ, व्यर्थ आसक्तियों से स्वयं को मुक्त रखूँगा।
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मैं समयपालक आत्मा हूँ, रोज़ अमृतवेला नियमित रूप से बैठूँगा।
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मैं अनुशासित आत्मा हूँ, दिनभर संकल्पों और दिनचर्या में मर्यादा रखूँगा।
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मैं सहनशील आत्मा हूँ, विरोध और आलोचना को भी धैर्य से स्वीकार करूँगा।
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मैं स्वच्छ आत्मा हूँ, अपने विचार, वचन और कर्म को पवित्र रखूँगा।
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मैं खुशीस्वरूप आत्मा हूँ, छोटी-छोटी बातों में भी खुशी बाँटूँगा।
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मैं सहयोगी आत्मा हूँ, सेवा के हर अवसर पर आगे बढ़कर सहयोग करूँगा।
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मैं निरहंकारी आत्मा हूँ, सफलता में भी विनम्रता बनाए रखूँगा।
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मैं संयमी आत्मा हूँ, भोजन, बोलचाल और स्क्रीन-टाइम में संतुलन रखूँगा।
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मैं सजग आत्मा हूँ, हर घंटे दो मिनट रुककर स्व-स्मृति में जाऊँगा।
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मैं योगयुक्त आत्मा हूँ, दिनभर में कई बार शिवबाबा की याद में जुड़ूँगा।
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मैं लोकहितकारी आत्मा हूँ, पृथ्वी और पाँचों तत्वों को सकाश भेजूँगा।
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मैं लक्ष्ययुक्त आत्मा हूँ, पूरे वर्ष इन 21 दिव्य बीजों को प्रतिदिन
सींचता रहूँगा।