Suraj Bhai Baba Milan Class - 31-12-25
ओम् शान्ति।
आज का दिन। सभी ब्रह्मा वत्सों के लिए बहुत बहुत मूल्यवान दिन होता है। सभी कुछ
न कुछ बाबा से अच्छे अनुभव पाते हैं। आज भी सभी सबसे पहले एक संकल्प पर चिंतन करेंगे।
कितना सुंदर संगमयुग भाग्यवान आत्माओं को मिला है। मेरे साथ साथ अपने अंदर समा लें।
भगवान साथ दे रहा है। ऐसा समय चारों युगों में कभी नहीं आता। अब हमारे सम्मुख है।
भगवान साथ दे रहा है समय अपने चित्त में सुंदर विचार को रोज सवेरे ही एक बार याद कर
लिया करें। हम अकेले नहीं हैं। स्वयं भगवान का साथ मिल रहा है। इससे हम शक्तिशाली
बनते चलेंगे और जीवन सरल भी होता चलेगा। आज यहां सभी को यह भी चिंतन करना है कि हमें
अपने इस संगमयुगी जीवन को पाँच हज़ार वर्ष की यात्रा के अन्तिम जन्म को सहज रूप से
जीना है, तभी हम प्रभु मिलन का सुख पा सकेंगे, उसका आनंद ले सकेंगे। बाबा ने हमें
युद्ध क्षेत्र पर खड़ा किया है। सब रोज मुरली में सुनते हैं। हमें सभी विकारों को
भी जीतना है। मैं आपको एक छोटी सी विधि सुना रहा हूँ जो आपको बहुत मदद करेगी। काम
क्रोध को जीतने में। रोज एक बार सवेरे 06:00 बजे तक अवश्य कर लेना है। 04:00 बजे
करेंगे तो बहुत अच्छा। मुझे माया पर जीत पानी है। इसके लिए। बाबा ने उसी दिन जब हम
उसके बच्चे बने थे। जब हमने उसको स्वीकार किया, उसने हमें स्वीकार किया। अपना हाथ
हमारे सिर पर रखकर विजयी भव का माया जीत भव का वरदान दिया और साथ में हाथ से अपनी
शक्तियां भी हमें ट्रांसफर कर दी। ईश्वरीय शक्तियां हमारे पास है। इससे ही हम माया
को जीतने में सफल हैं, सक्षम हैं तो चलिए एक मिनट के लिए अनुभूति कर लें।
फील करें। बापदादा सम्मुख आ गए। यह वो
है। जो हमारे अपने हैं। बाबा ने अपना हाथ मेरे सिर पर रख दिया। और बोले बच्चे विजयी
भव। मायाजीत भव। और अपने हाथ से अपनी सारी शक्तियां हमें दे दी। फील करें। उनके हाथ
से शक्तियों की किरणें मुझमें समा रही हैं ।
ओम शांति।
यह छोटी सी प्रैक्टिस हमें रोज जगाएगी। और हमें ऐसा नहीं लगेगा कि माया को जीतना
कोई कठिन काम है। धीरे धीरे यह एहसास होता रहेगा। नशा चढ़ता जायेगा कि कल्प कल्प
हमने इस माया को जीता है। यह नशा बहुत आवश्यक है। मैं कल्प कल्प की विजयी आत्मा
हूँ। इससे क्या होता है? सभी अपने ख्यालों में समाएंगे इसको। इससे हमारी विजय
प्राप्त करने की शक्तियां जागृत रहती हैं। शक्तियाँ हमें ऑटोमेटिकली माया के प्रभाव
से मुक्त रखेंगी। एक और अच्छा अभ्यास करेंगे। छोटी सी अभ्यास भी नहीं। छोटा सा
प्रयोग क्योंकि विषय विकारों ने हमारे तन पर भी बुरा इफेक्ट डाला है। यह वासनाएं
मनुष्य के अंग अंग में भी समाई होती हैं। इसलिए कर्मेन्द्रियाँ चंचल रहती हैं,
उत्तेजित रहती हैं। हम रोज कई बार पानी को इस संकल्प से चार्ज करके पिया करें। मैं
परम पवित्र आत्मा हूँ। आपने सुना ही होगा कि जो पानी है यह बहुत जल्दी हमारी
वाइब्रेशंस को अपने में समा लेता है। आप पांच बार तीन बार भी यह संकल्प कर लेंगे।
दृष्टि देकर तो पानी में पवित्र वाइब्रेशंस भर जायेंगे। वह शरीर में जायेगा और अंगों
को शीतल करेगा। इससे बहुत बड़ा फायदा होगा क्योंकि अगर हमारा तन भी साथ साथ पावन
होने लगे तो मन को पावन करने में बहुत बड़ी मदद मिल जाती है। फिर से याद करें इस
संगम युग पर हमें भगवान का साथ मिल रहा है। देखो, कोई व्यक्ति संसार में गरीब हो और
उसे किसी धनवान व्यक्ति का साथ मिल जाए। सहयोग मिल जाए तो उसका जीवन भी सुखी हो जाता
है। हमें तो मिल रहा है स्वयं सर्वशक्तिवान का साथ और सहयोग। जितना जितना कोई स्मृति
में लाएंगे, बहुत अच्छी अनुभूतियां होंगी। बाबा ने सहज योग का सहज तरीका सुनाया है
कि अगर तुम्हें यह भी याद रहे स्वयं सर्वशक्तिवान मेरे साथ है तो उसकी शक्तियाँ
तुममें समाती रहेंगी। हम शक्तिशाली बनते जायेंगे और बहुत अच्छा उदाहरण था। मान लो
तुम एक भयानक जंगल से गुजर रहे हो जहाँ हिंसक जानवर हैं। तुम कमजोर हो लेकिन
तुम्हारे साथ 457 बहुत पावरफुल बंदूकधारी हैं। तो तुम निर्भय हो जाओगे ना? बाबा ने
उस दिन कहा था ना, तुम कमजोर भी हो, लेकिन सर्वशक्तिवान तुम्हारे साथ है। अगर तुम
यह स्मृति रहे तो तुम कमज़ोर नहीं रहोगे, बहुत पावरफुल हो जाओगे। इस सहज योग की विधि
को सभी अपनाकर चलें। इससे बहुत बड़े फायदे होंगे। क्योंकि जो संकल्प हमारे मन में
होते हैं, उसके ही वाइब्रेशन्स चारों ओर फैलते रहते हैं। तो आप जब ये अभ्यास करेंगे
तो शक्तियों के वाइब्रेशन्स चारों ओर फैलेंगे। बहुत कुछ आपेही ठीक हो जाएगा। ठीक
करना ही नहीं पड़ेगा। कई समस्याएं बाधाएं आने से पहले ही नष्ट हो जाएंगी। ये बहुत
अच्छी अनुभूति रहेगी। आज संकल्प करें मुझे अपने जीवन को सहज जीवन बनाना है। सहज उसके
लिए कुछ बातों पर ध्यान देंगे। अपने परिवारों में, अपने घरों में एक बहुत अच्छी छोटी
सी कहावत है बाबा भी उसे याद दिलाया करते थे। एक ने कहा, दूसरे ने माना सहजता आ जाती
है। अगर हम एक दूसरे के विचारों को परिवारों में भी सम्मान नहीं देते तो क्लिष्टता
रहती है, जटिलता रहती है। परिवारों में भी सुख शांति का माहौल नहीं रहता। एक कहे,
दूसरा माने एक बात। दूसरी बात हमें संगम युग पर मैं एक एक लाइन में बता हा हूं।
केवल स्वयं को संतुष्ट अवश्य रखना है, पर चिंतन करेंगे। यदि भगवान को पाकर भी कोई
संतुष्ट न हुआ तो कब होगा? ऐसा नहीं। हमारी कामनाएं, हमारी इच्छाएं हमें असंतोष की
अग्नि में जलाती रहे हैं। बाबा का बहुत ही सीक्रेट। बहुत ही गुह्य राज भरा महावाक्य।
एक लाइन का जो संतोष आत्माएं होती हैं, प्रकृति उन्हें सब कुछ प्रदान करती है।
संभालो अपने चित्त में जो संतुष्ट हैं। बाबा ने तो और पावरफुल बात कही। शक्तियां
उनकी ओर आकर्षित होती रहती हैं। सन्तुष्ट आत्माएं इस संसार की ब्यूटी हैं। अपने को
सन्तुष्ट आत्मा बनाएं। जो मन की भाग दौड़ है। यह प्राप्त हो। यह प्राप्त हो। हम
जानते हैं संसार में कंपटीशन है। आप सबको परिवार है, आपके बच्चे हैं। आपको कई चीजों
पर ध्यान देना होता है। लेकिन बाबा का एक महावाक्य कभी नहीं बोलना। भगवान का
महावाक्य है। जिनके पास ज्ञान धन बहुत होगा, उन्हें स्थूल धन कमाने में मेहनत नहीं
लगेगी। बहुत गहरा महावाक्य है। धन आपके पीछे पीछे आयेगा। ज्ञान धन से, ज्ञान रत्नों
से अपनी झोली भरते चलो। केवल भविष्य की बात नहीं कि भविष्य में हम बहुत धनवान रहेंगे,
लेकिन संगमयुग पर भी हम धन से सम्पन्न रहेंगे। और आगे चलें। मनुष्य ने कलियुग के
अंत में आते आते आप सब चेक कर लेंगे। अपने को क्यों सहज जीवन नहीं रहता। मनुष्य ने
कलियुग के अंत में पहुंचते पहुंचते अपनी भावनाओं को बहुत बिगाड़ लिया है। अगर 50
लोग आपके कांटेक्ट में हैं, यह ऐसा है, यह ऐसा है, यह ऐसा है। अब इस सब को एक ही
एटीट्यूड में बदल दो। एक ही दृष्टि में यह सभी आत्माएं हैं। भगवान के बच्चे हैं। सभी
बहुत अच्छे हैं। अब इसका परिणाम देखना आपके चारों ओर के वाइब्रेशंस बहुत अलौकिक हो
जाएंगे। करके देखना है। सभी को अपने घरों में, अपने ऑफिस में, अपने बिजनेस सेंटर
में। सभी आत्माएं बहुत अच्छी है। अपने घर में बैठकर भी मानसिक रूप से संसार की सभी
आत्माओं को देखना और। संकल्प करना यह सभी आत्माएं बहुत अच्छी हैं। यह सभी आत्माएं
अपना अपना पार्ट बजा रही हैं। बहुत गहरी बात। बाबा ने ड्रामा की सुनाई। सभी इस पर
अभ्यास करेंगे। देखो, मैंने भी इन चीजों को खूब जीवन में लाया। सभी आत्माएं। इस
संसार में अपना अपना पार्ट बजा रही हैं। यहां किसी का कोई दोष नहीं है।
चलो एक मिनट फिर से डीप
साइलेंस में। और अपने चारों ओर करोड़ों आत्माओं को देखकर संकल्प करें। देखें चमकती
मणियाँ। करोड़ों। संकल्प करें ये सभी आत्माएं भगवान की संतान हैं। हमारे हैं। सब
बहुत अच्छे हैं। सबको दुआएं देते हैं। सबका कल्याण हो। सभी सुखी हों। सब हों सभी।
प्रभु मिलन का आनंद प्राप्त करें। सबके घरों में प्रेम, सुख शांति। सब की गंगा बहने
लगे। सब बहुत अच्छे हैं।
ओम शांति।
अपनी भावनाओं को शुद्ध रखना है। बहुत सुंदर विषय है यह। सभी अपने अपने मन की भावनाओं
को चेक करें। कहीं ईर्ष्या भाव तो नहीं? कहीं वैर भाव तो नहीं? कहीं स्वार्थ भाव तो
नहीं? कहीं हमने यह तो नहीं मान लिया? ध्यान देंगे सभी जो कलियुग के अंत का बहुत बड़ा
अशांति दुखों का कारण बन गया है। मनी इज एवरीथिंग। धन ही सब कुछ है। कहीं हमने यह
तो नहीं मान लिया कि संबंध और रिश्तों का कोई मूल्य नहीं? जिसके पास धन है, वही
महान है। यह बहुत गलत मान्यता कलियुग में अशांति की अग्नि को प्रज्वलित कर रही है।
इसलिए सभी अपनी भावनाओं को शुद्ध करेंगे। आज का दिन बहुत सुंदर है। एक संकल्प ले
ले। मुझे अपने जीवन में स्वयं को सरल चित्त बनाना है। इंग्लिश में बहुत अच्छे शब्द
हैं। ईजी गोइंग नेचर, सरल स्वभाव सब कुछ सहज भाव से देखना। बाबा ने हम सभी को ड्रामा
का बहुत। ही ज्ञान दिया है। इस ज्ञान की चर्चा किसी ग्रंथ में नहीं है। बहुत थोड़ा
थोड़ा जिसको। बाबा कहते हैं आटे में नमक। आदि में क्या था? बीच में क्या हुआ? पतन
क्यों हुआ? उत्थान कैसे होगा? बहुत गुह्य ज्ञान दिया है इस ड्रामा के ज्ञान की। कम
से कम कोई पाँच बातें अपने पास अलग से नोट कर लेना, उन पर वर्क करना, उन पर काम करते
रहना। जैसे, मनुष्य के मन में संसार में बहुत कुछ देखकर क्या क्यों के प्रश्न उठते
हैं? कई लोग तो यही सोचते हैं भगवान ऐसा क्यों कर रहा है? वो नहीं कर रहा है। इस
संसार में मनुष्य के कर्मों का खेल चल रहा है। जो कुछ भी जिसके साथ हो रहा है वो
उसके कर्मों का ही फल है। इसलिए जो कुछ हो रहा है। भगवानुवाच। वही सत्य है। बहुत
गहरी बात है तो क्यों का क्वेश्चन क्या क्यों समाप्त करना है? ड्रामा बिल्कुल
एक्यूरेट चल रहा है। कोई करेक्शन की जरूरत नहीं। इसके साथ ऐसा, उसके साथ ऐसा क्यों?
यह क्यों का? उत्तर ज्ञानी आत्माओं के पास पहले से ही है। जिनके पास नहीं है, उनके
पास होना चाहिए। इससे चित्त को शांत करेंगे। मन जितना शांत होगा, उतनी एकाग्रता
बढ़ेगी। बुद्धि डिवाइन होगी। मन शक्तिशाली होगा, क्योंकि मन की शक्तियां ओवरथिंकिंग
से ज्यादा सोचने से ही नष्ट हो रही हैं। हम अपने चित्त को शांत करना सीख लें। ड्रामा
के ज्ञान के द्वारा विशेष रूप से और अपने जीवन को सरल जीवन बनाना है। सहज योगी भी
बनना है सहज योगी। नोट करें इस बात को। योग सरल सब्जेक्ट है। शास्त्रों में योग की
व्याख्या है। जो उसकी विधि है वह अति जटिल, अति कठिन है। बाबा ने सिंपल बता दिया आप
आत्मायें हो। हो जाओ आत्मा। मैं यह हूँ लगाव बुद्धि। मेरे से बिल्कुल सिंपलीफाइड कर
दिया। उसकी जो क्लिष्टता थी, जो आज तक कोई जानता ही नहीं था कि योग क्या है। यद्यपि
यह भी कहीं कहीं लिखा है आत्मा और परमात्मा का मिलन ही योग है। परंतु कैसे मिलन हो
किसी को पता नहीं चला। अब जब हमारे पास संपूर्ण ज्ञान है तो एक सुंदर संकल्प कर
लें। हम ही योग नहीं बनेंगे तो कौन बनेगा? जिनके पास संपूर्ण ज्ञान है, जिन्हें
भगवान का साथ मिल रहा है, जिसने बहुत कुछ त्याग कर दिया है। ऐसी महान आत्माएं ही यदि
योगी नहीं बनेंगी तो कौन बनेगा? चलते फिरते लाइट हाउस बन जाना है। हमें सहज योग की
कुछ विधि मैं आपके सामने रखूंगा। उसमें से एक यह है चलते फिरते बीच बीच में कोई चीज
ऐसी नहीं। सारा दिन रटते रहें बीच बीच में थोड़ा थोड़ा भी स्मृति में लाएं। मैं
लाइट हाउस व्हाइट हाउस फरिश्ता हूं। सुनते सुनते फीलिंग में मेरे अंग अंग से लाइट
माइट की किरणें फैल रही है। मैं लाइट हाउस माइट हाउस फरिश्ता हूं। इस अभ्यास से
संसार का कल्याण होता रहेगा। आपके घर के वायब्रेशन बहुत अलौकिक और पावरफुल होते
रहेंगे। बीच बीच में याद कर लिया करें। दूसरा सहज और पावरफुल योग। अभी ट्रैफिक
कंट्रोल का गीत बजेगा। उसमें वही अभ्यास करेंगे। सुन लें। बाबा से शक्तियों की किरणें
एक फाउंटेन के रूप में मुझ पर पड़ रही हैं। चलते फिरते अभ्यास किया करें। अब आपके
पास छत हो। आपके पास घूमने की गैलरी हो। 20, 25, 30 फुट भी जगह हो। घूम फिरकर
अभ्यास किया करें। कभी पवित्रता की किरणें पड़ रही हैं, कभी शान्ति की किरणें पड़
रही हैं, कभी शक्तियों की। जैसे बरसात हो रही है। यह फैलती जायेगी चारों ओर। संसार
में वाइब्रेशन्स अलौकिक होते जायेंगे। अभी चलें, हम बैठें इसी स्वरूप में। गीत भी
बजेगा। ऊपर देखें ज्ञान सूर्य। उनकी शक्तियों की किरणें पड़ रही हैं।
योगी जीवन है। प्यारा। योगी बनो, ज्ञानी बनो। क्योंकि जीवन है प्यारा। काम, क्रोध,
मद, लोभ। मोह वश। आज है सब मोहताज। योग लगा कर पाप मिटा ले। स्वर्ग। सजा ले तू। आज
काम, क्रोध, मद लोभ मोह वश। आज है सब मोहताज। योग लगा कर पाप मिटा ले। स्वर्ग। सजा
ले तू आज। जनम जनम की प्यास बुझाने। पावन बन कर काल। योगी। बनो। ज्ञानी बनो योगी।
जीवन है प्यारा। संगम युग में परमपिता शिव। कहते है ये राज़ तू। है एक अविनाशी आत्मा।
सुन लो मेरी आवाज़। संगम युग में परमपिता शिव कहते है ये राज़ तू। है इक अविनाशी
आत्मा। सुन लो मेरी आवाज़। सुख शान्ति और पावनता से झोली भर लो। राज योगी बनो।
ज्ञानी बनो योगी। जीवन है प्यारा। परमधाम से आये हैं शिव। ब्रह्मा तन आधार। मुक्ति
और जीवनमुक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार। परमधाम से आये हैं शिव। ब्रह्मा तन आधार। मुक्ति
और जीवनमुक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार। चलना है। चलना है घर वापस। अब तो यही ज्ञान का
सार। योगी बनो। ज्ञानी बनो। योगी जीवन है प्यारा। योगी जीवन है प्यारा।
योग राज योग एक सीक्रेट और जान लें सभी। जन्म लेते लेते सतयुग से नीचे आते आते बाबा
के जो शब्द हैं, तुम्हारी बैटरी डिस्चार्ज हो गई है। लेकिन आत्मा की बैटरी
डिस्चार्ज होने के साथ साथ ब्रेन भी बहुत कमजोर हो चुके हैं। मनुष्य के। यूज ज्यादा
ब्रेन की शक्तियां कम हो चुकी हैं। इसलिए किसी किसी को अनुभव होता है कि जैसे ही वह
परमधाम में जाने की प्रैक्टिस करते हैं, थोड़ी देर में सिर भारी होने लगता है। थोड़े
लोगों को यह अनुभव होता है। यही कारण है इस राज योग का सीधा संबंध रीति से है।
क्योंकि रीति हमारे ब्रेन को शक्तिशाली बनाती है। अगर हम अपनी शक्तियों को बचाते
हैं, वह सूक्ष्म रूप धारण कर के ब्रेन को दिव्य भी करती है, शक्तिशाली भी करती है,
तब ब्रेन मदद करता है। मन बुद्धि को एकाग्र होने में इसका ध्यान रखेंगे। कभी इससे
परेशान नहीं होना है। अगर आपको ऐसा लगे कि परमधाम में जाना होता नहीं है क्योंकि
इसके लिए चित्त बहुत शांत हो तो पहले। अशरीरी पन का बहुत अच्छा अभ्यास करना चाहिए।
हम सभी मूल्यों में सुन रहे हैं। कई दिनों से बहुत प्यारी बात है बाबा की। और बहुत
सरल है हमारी सभी साधनाएं। अति सरल है खुद को भृकुटि सिंहासन पर आत्मा देखो, दूसरों
को भी अकाल तख्त पर बैठी हुई आत्मा देखो। यह बहुत सिम्पल प्रैक्टिस, मोस्ट पावरफुल
इन द वर्ल्ड। चार पाँच दिन पहले बाबा ने कहा, बच्चे, सामने देखो, अपने परम आत्मा
ब्रह्मा के अकाल तख्त पर तुम्हारे सामने बैठे हैं। ऐसे ही अपने को भी देखो। मैं भी
अकाल तख्त पर इस तन में बैठी हूँ और दूसरों को भी इसी स्वरूप से देखो यह योग को सरल
बनाने की सर्वोत्तम विधि है। जिसका मन बहुत भटकता हो, जिसने कभी एकाग्रता का अनुभव
ही ना किया हो वो एक हफ्ता केवल ध्यान लगाकर देखो मैं भी आत्मा सब आत्माएं जो दिखाई
दे, आत्मा दिखाई दे। केवल एक हफ्ता आपको पता चलेगा। अनेक व्यर्थ संकल्प समाप्त हो
रहे हैं क्योंकि व्यर्थ संकल्पों का बीज दैहिक दृष्टि ही है। यहीं से शुरुआत होती
है। आत्मिक दृष्टि होते ही बहुत ज्यादा व्यर्थ समाप्त हो जाता है। हमें प्रैक्टिस
करनी है बहुत अच्छी, अगर बुद्धि परमधाम में स्थित नहीं होती तो परमधाम वाले को नीचे
बुला लो। बहुत पावरफुल अभ्यास होगा और इसमें एक बात अपने चित्त में और संभाले सभी
बाबा मेरा है। देखो रोज की बात हम सब सुनते हैं, वह मेरा है। इसको फीलिंग में लाओ।
मेरा कितना बड़ा शब्द है यह। कितना सुंदर मीनिंगफुल वर्ड है यह मेरा और जब मेरा है
तो उस पर मेरा अधिकार है। बहुत बुद्धिमान यहां बैठे हैं हजारों की सभा में वह इस
बात को रियलाइज करें। भगवान पर भी मेरा अधिकार, क्योंकि वह मेरा है उसे अपना खुदा
दोस्त भी बनाएंगे। आगे हम इस बात पर आते हैं।
अब चलें हम अधिकार से। बाबा को
बुलाएंगे नीचे। ले चलें। बुद्धि ऊपर। और निहारें सर्वशक्तिवान को, ज्ञान सूर्य को।
जिसकी किरणें चारों ओर दूर दूर तक फैल रही हैं। उसका और उसका आभामंडल छोटा सा नहीं,
अति विशाल। अब अधिकार से शिवबाबा को कहें। हे प्राणेश्वर! अपना धाम छोड़कर हमारी
छत्रछाया बन जाओ। और देखें ऊपर की ओर। सर्वशक्तिवान ज्ञान सूर्य अपनी तेजस्वी किरणें
चारों ओर फैलाते हुए नीचे आ रहे हैं। आ गए मेरे सिर के ऊपर। देखें। सभी अपने सिर के
ऊपर सर्वशक्तिवान छत्र छाया। हुआ। मैं उसकी छत्र छाया में सुरक्षित हूँ। आज का
महावाक्य याद कर लें। जिसके साथ स्वयं भगवान हो उसका कोई कुछ कर नहीं सकता। सर्व
शक्तिमान छत्र छाया। अपनी शक्तियों की किरणें देख कर बाबा गए वापिस अपने धाम। ओम्
शान्ति। यह भी बहुत पावरफुल योग है। इससे विकर्म विनाश होंगे। बहुत पावरफुल योग का
अर्थ है बीजरूप योग। ज्वाला स्वरूप योग। ज्वालामुखी योग। यह एक ही शब्द है, सब उसका
अर्थ है। जब मन एक संकल्प में बाबा के साथ कुछ देर स्थित हो जाए। वह है बीजरूप
ज्वाला स्वरूप। एक संकल्प में स्थित हो जाना। तो मन शान्त है।
तो बाबा की सारी शक्तियां हममें भर जाएंगी और ये शक्तियां विकर्मों को नष्ट करेगी।
हमें मायाजीत बनायेंगी। पॉवरफुल बनायेंगी। बाबा हमारे साथ है। उस पर हमारा अधिकार
है। अपने जीवन में मैं बहुत इम्पोर्टेन्ट बात अपने जीवन में बाबा का साथ लेना सीख
लें। सभी। जब भी कठिनाई आती है बाबा के महावाक्य भी हैं। जब भी जरूरत पड़ती है, जब
भी हमें लगे हमें हम अकेले रह गये। बाबा का आह्वान कर लें। बाबा के बहुत अच्छे शब्द
हैं, उनको चित्त में समाएंगे। बच्चे। हजार भुजा वाला बापदादा तुम्हें हर समय मदद
देने को तैयार रहता है। लेकिन जब देखता है कि बच्चे हजार भुजा वाले को छोड़कर दो भुजा
वालों के पास जा रहे हैं तो सोचते हैं अब इनके लिए क्या करें। उनका हमसे बहुत प्यार
है। रियलाइज करें सभी को। प्यार के सागर हैं। उनका सम्पूर्ण प्यार अपने बच्चों के
लिए ही है। आप सब गृहस्थ में रहने वाले जानते हो आपका प्यार आपके बच्चों के लिए होता
है। वो भी हमें बहुत प्यार करता है और कभी दुखों में, कष्टों में, परेशानियों में,
चिंताओं में देखना नहीं चाहता। इसलिए याद दिलाता है बच्चे मैं तुम्हारे साथ हूँ,
तुम्हें मदद करने के लिए हमेशा तैयार हूँ। बस मेरे पास आओ। तो दो तरीके हैं या तो
हम सूक्ष्म लोक में चला करें, इसकी आदत डाल दें। बाबा से अपनी बात कहें, अधिकार से
मदद के लिए कहें। उन्हें अधिकार से या बाप दादा को नीचे बुला लें। और अधिकार से उनको
कहें यह चाहिए आपसे यह मदद चाहिए तो बाबा ने बहुत अच्छा उत्तर दिया है। कई बच्चे
सोचते हैं बाप तो निराकार है, मदद कैसे करेगा? बहुत सुंदर उत्तर है, किसी न किसी को
निमित्त बनाकर तुम्हें मदद कर देंगे। सर्विस का अनुभव करें तो बाबा हजार भुजाओं
सहित हमारे साथ है। बस हम उससे कनेक्ट हो जाएं, उसको बुला लें। खेल बदलता हुआ नजर
आएगा और बहुत अच्छा नाता जोड़ लेंगे। उससे देखो भक्तों के लिए तो वह भगवान है,
लेकिन हमारे लिए सोच लो। भक्तों के लिए भगवान और हमारे लिए हमारा अपना प्यारा बाबा।
आज उसको अपना खुदा दोस्त भी बना ले खुदा। दोस्त भगवान कहने से उसे डरते भी रहे हम
सब। बहुत दूरी भी बहुत रखी। भक्ति इस तरह करनी चाहिए। नियम ये हैं, कायदे ये हैं।
यहां कोई नियम कायदा नहीं। बाबा तुम्हारा है बस। आ जाओ मेरे पास। उसको आज से अपना
खुदा। दोस्त बनाओ नाता जोड़ो अभी से। वो बाप टीचर, सद्गुरु है, मात पिता है। लेकिन
आज से मेरा सच्चा दोस्त। गुड फ्रेंड। खुदा दोस्त है। और खुदा दोस्त के रूप में उसको
बुलाया करें। थोड़ी थोड़ी देर फीलिंग किया करें। 20 सेकंड से शुरू करें, उसको बुलाएं।
बाप दादा आ गए। हाथ पकड़ लिया। दोनों चल रहे हैं। वह मेरा खुदा दोस्त है। बात कह
दे। जो कुछ उसको कहनी है। दोस्त बहुत घनिष्ठ नाता होता है दोस्ती का। इस पर आप सभी
चिंता करें। चिंतन करेंगे तो अभी हम अधिकार से बाबा को बुलाएंगे।
चलें अब फिर से पहले चलेंगे बाबा के पास। सूक्ष्म लोक में जो
प्रैक्टिस सबको रोज एक दो बार करनी है। बस संकल्प करें मैं यहां नहीं आकाश के परे।
दूसरे आकाश में जहां चारों ओर सफेद प्रकाश फैला है। परमानंद है। मेहमानों। सामने।
बापदादा कमल आसन पर विराजमान है। बहुत सुंदर। उनका स्वरूप देखें। मस्तक में ज्ञान
सूर्य चमक रहे हैं। बाबा मुझे दृष्टि दे रहे हैं। और दृष्टि लेते मन ही मन बाबा को
निमंत्रण देते बाबा आ जाओ हमारे पास, चलो मेरे साथ नीचे। और देखें। बाबा ने हमारा
हाथ पकड़ा और हम दोनों उतरते हुए नीचे आ रहे हैं। आ गए अपने स्थान पर बाप दादा सामने।
फील करें उनके वाइब्रेशंस को उनका आभामंडल बहुत डिवाइन, बहुत विशाल है। और उनके
वाइब्रेशंस मुझमें समा रहे हैं। अब जो कुछ उन्हें कहना है कह दो अधिकार से। खुदा
दोस्त के नाते से। और दृष्टि देखकर बाबा वापिस गए अपने धाम।
ओम् शान्ति।
यह बाबा का आह्वान। हमारे योग को सरल कर देता है। माताएं अपने घरों में एक दो बार
अच्छी तरह बाबा को बुलाकर फील किया करे। उनके वाइब्रेशन्स फैल रहे हैं पूरे घर में।
भाई लोग भी करें और जब घर से बाहर चलें तो बाबा का आह्वान करके खुदा दोस्त मेरे साथ
चलो। एक बार हाथ पकड़ने का अनुभव कर के फिर चलें। अपने कार्यों के लिए बहुत अच्छे
अनुभव होंगे क्योंकि आने वाला समय कुछ और सीन लेकर आ रहा है। उसको पार करने के लिए
हमें बाबा की मदद की बहुत ज्यादा जरूरत रहेगी। हर पल। रोज हर कदम पर अपने जीवन को
सहज बनाने के लिए दो बातें और। इस संसार में बहुत कुछ ऐसा होता है। हो रहा है, होता
रहेगा। जिसको हम बदल नहीं सकते, उसे स्वीकार कर लेना है। उसमें मन को उलझाना है ना
भटकाना है। जो होगा वही तो होना है। जो हो रहा है। यही तो होना है। युग परिवर्तन
होगा। हर मनुष्य की एक्सपेक्टेशन से बहुत ज्यादा कुछ होगा यहां स्वीकार करना। चित्त
शांत होगा। दूसरी बात मन के सारे बोझ बाबा को देने की प्रैक्टिस करें। बाबा का बहुत
गहरा महावाक्य कम से कम 35 साल पुराना है। सभी उसको अपने चित्त में समा लें और बाबा
के प्यार को अनुभव करें। जो बाप सारे संसार का बोझ उठाने वाला है, क्या वो अपने
बच्चों का बोझ नहीं उठाएगा?
फील करें। सत्य को स्वीकार करें। बोझ देने की प्रैक्टिस करें। बोझ देकर थोड़ा
निश्चिन्त हों। मनुष्य की क्या आदत है? मनुष्य चाहता है अभी बोझ दिया। अभी सब कुछ
ठीक हो जाए। लेकिन हर चीज के ठीक होने का एक प्रॉपर टाइम होता है। सब कुछ अभी हो
जाए ऐसा नहीं होता है। हमारे कर्म उसमें बाधक बनते हैं। इसलिए बाबा को देखकर उस पर
विश्वास रखते हुए बहुत हल्का अपने को करेंगे। हल्का रहना यह ज्ञानियों की पहचान है।
छोटी छोटी बातों में भारी नहीं हो जाएं। ध्यान देंगे। इस पर चिंतन करेंगे। मुरली के
महत्व को ध्यान में रखते हुए उसमें जो सुंदर बातें आती हैं, उनका जीवन में प्रयोग
करें। उपयोग में लाएं। उन्हें उन्हें अपने मन में संभालें, चिंतन में संभाले। आज यह
बात कितनी अच्छी थी जो मैंने आप सबको सुनाई। भगवान जिनका साथी हो उनका कोई कुछ कर
नहीं सकता। एक ही लाइन में बाबा ने बड़े बड़े रहस्य बता दिए तो हम सभी। आप सभी इस
सुंदर पथ पर आ गए हैं। यह सुंदर यात्रा अब लास्ट में मेरे साथ चिंतन करें। मैं आत्मा
कितनी भाग्यवान हूं। कि जब हमारी पाँच हज़ार साल की यात्रा, लंबी यात्रा पूरी हो रही
थी, तब स्वयं सर्वशक्तिवान खुदा दोस्त बन कर हमारे साथी बन गए और कहा बच्चे, तुम
अकेले नहीं हो, मैं इस यात्रा में तुम्हारे साथ हूं। लो सारे बोझ मुझे दे दो। जितना
भी मत का बोझ है उसने ले लिया तो अपने को बहुत खुशी में बहुत नशे में रखेंगे और समय
ऐसा है जो बुद्धिमान ज्ञानी आत्मा मन को भटकने से बचा ले। वही संसार में बहुत कुछ
कर पाएंगे क्योंकि अब आगे का जीवन हमारा हमारे लिए नहीं रहेगा, संसार के लिए रहेगा।
हमें दूसरों के लिए ही जीना होगा, उनके दुख हरने होंगे, उनके कष्ट निवारण करने होंगे।
अपने को तैयार करें। कहीं भी उलझा कर अपनी शक्तियों को व्यर्थ में नहीं जाने देना
है। मुरली सुनेंगे सभी, बस बाबा को देखना। और प्रैक्टिस करें। दादी का चित्र दिखाई
देगा। फोटो। मस्तक में ज्ञान सूर्य बैठा है। मुख से बोल रहा है। जो बोल रहा है उसका
रस लेते चलें। उसको समझाते चलें तो मुरली का टाइम बड़ा सुखदाई। एनर्जी देने वाला
जीवन को एनर्जेटिक करने वाला हो जाएगा और आज के महावाक्यों से मधुर शान्तिवन की
यात्रा से कोई भी एक सुंदर बात अपने साथ ले जाना। फॉर एवर सदा के लिए जिसको सदा हम
साथ रखेंगे। जो यादगार बनेगी हमारी यात्रा की तो बाबा को खुदा दोस्त बनाएंगे। अभी
हम चलेंगे सर्वशक्तिवान के पास, उसके घर में, अपने घर में और उसकी शक्तियों से अपने
को भरपूर करेंगे।
ओम शांति।
Pease forgive for any spelling mistake as it was typed
from Video class.
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